श्रद्धा : धौलपुर रियासत के महाराज हैं भगवान नृसिंह
नृसिंह जी के दर्शन से पूरी होती है मनोकामना, धौलपुर राज परिवार की भी रही अगाध श्रद्धा
– प्रदीप कुमार वर्मा
राजस्थान का पूर्वी प्रवेश द्वार धौलपुर। तीर्थराज मचकुंड सरोवर का शहर धौलपुर। आमजन में रणछोड़ नगरी के नाम से चर्चित धौलपुर। और राजाओं के राजा नृसिंह महाराज का धाम धौलपुर। धौलपुर के डयोड़ी इलाके में स्थित रियासत कालीन मंदिर में भगवान नृसिंह शिला अथवा सालिगराम के रूप में विराजमान हैं। भगवान नृसिंह को धौलपुर रियासत के जाट राजाओं का कुल देवता भी कहा जाता है। इस मंदिर से जुड़ी कहानी के अनुसार, जब गोहद के महाराज कीरत सिंह युद्ध में गोहद राज्य हार गए थे, तो उन्हें जंगलों में भटकना पड़ा था। जंगलों में ही महाराज कीरत सिंह को साधु-संतों ने भगवान नृसिंह की प्रतिमा दी और कहा कि 6 महीने पूजा करने के बाद आप किसी न किसी राज्य के राजा बन जाएँगे। साधु-संतों के बताए अनुसार महाराजा कीरत सिंह शिला रूपी भगवान नृसिंह की पूजा अर्चना की। और इस प्रकार 6 महीने भगवान नृसिंह की पूजा करने के बाद महाराज कीरत सिंह धौलपुर रियासत के राजा बने। जिसके बाद उन्होंने भगवान नृसिंह का भव्य मंदिर स्थापित करवया। भगवान नृसिंह मंदिर के मुख्य पुजारी डॉ. रविन्द्र श्रोत्रिय बताते हैं धौलपुर के शेरगढ़ के किले में महाराज कीरत सिंह ने अपने राज्याभिषेक से पहले भगवान नृसिंह का राज्याभिषेक करवाया। धौलपुर रियासत के समय जब कहीं दरबार लगता था तो नृसिंह भगवान का राज सिंहासन सबसे ऊंचा होता था। महाराजा उदयभान सिंह ने अपने राज के दौरान भगवान नृसिंह के लिए मेड इन जर्मनी की सबसे महंगी कार खरीदी थी। इसी कार से भगवान की प्रतिमा को नगर भ्रमण कराया जाता था। महाराजा नृसिंह जी के प्रति धौलपुर राज परिवार की अगाध श्रद्धा का ही उदाहरण है कि धौलपुर महाराजाओं ने कुछ समय के लिए धौलपुर का नाम भी “नृसिंह स्टेट” रख दिया था। महाराजाओं ने अपनी सेना का नाम भी “नृसिंह इन्फेंट्री” रख दिया और अपने राज पत्रों और रियासत के झंडों पर भी भगवान नरसिंह की फोटो लगा दी थी। मंदिर के मुख्य पुजारी डॉ. रविन्द्र श्रोत्रिय बताते हैं कि यहां पर नृसिंह भगवान का विशाल विग्रह रूप नहीं है। शालिग्राम के रूप में भगवान नृसिंह यहां स्थापित हैं, जिनके दर्शन मात्र से मनोकामना पूर्ण होती है। धौलपुर के रियासत कालीन भगवान नृसिंह जी मंदिर पर संत गोस्वामी तुलसीदास की जयंती, शरद पूर्णिमा,जन्माष्टमी तथा नृसिंह जयंती जैसे पर्व बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। इन धार्मिक आयोजनों में आज भी राज परिवार के सदस्यों से लेकर आम भक्त बड़ी संख्या में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
-लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।
श्रद्धा : धौलपुर रियासत के महाराज हैं भगवान नृसिंह









